मैं हर शाम एक गुनाह करता हूं।
तूझ से दूर होकर भी , तेरी याद मे ,
अपनी लिखी एक किताब पढता हूं।
#रवि_वर्मा
तूझ से दूर होकर भी , तेरी याद मे ,
अपनी लिखी एक किताब पढता हूं।
#रवि_वर्मा
Er.Ravi Verma, Son of -sri.Umesh Chandra Verma And smt.Vidya Verma, "Poet by birth and an engineer by profession" Anchor || Writer || Host || Storyteller || Author || Page maker ||
पंख लगाकर चाहतो का, उड़ान हमें सिखाते हैं। राह-ए-मंजिल, हर सफ़र में, हमको वही दिखाते हैं। बचपन से वो साथ हमारे लिखते हैं मिटाते है...
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