Friday, 24 November 2017

ख्वाहिशें


ख्वाहिशें

"ख्वाहिशें" जो टुट के सताने लगती है।
सोता हु , तो ख्वाबों में आने लगती है।
जिन्दगी उस कस्ती का नाम है,
जो हर पल नया जहां चाहती हैं।

-रवि वर्मा

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