
मुद्दतों बाद फिर तेरी यादों के बादल
कुछ मुझे हंसा ,तो कुछ, रूला रहे थे।
तेरी यादों में अक्सर, मैं सोना भुल जाता हूँ।
आंसू आते हैं आंखों मे, पर, मै रोना भुल जाता हूँ।"
एक बहुत प्यारा रिश्ता है तुम से मेरा।
हा मैं वही हू , जिसें लोग कहते थे आशिक तेरा।
आज भी मैं ऊसी रस्ते पे तेरा इंतज़ार करता हूं।
तुझे क्या पता , हाल-ए-दिल मेरा , मै आज कल सुबह को शाम कहता हूं।
जहां ने मुझे हर पल प्यार ही प्यार दिया है।
बस इसी लिए , तुम से दूर जाने के बाद, मैंने अपना सबकुछ जहां के नाम किया है।
- रवि वर्मा
हा मैं वही हू , जिसें लोग कहते थे आशिक तेरा।
आज भी मैं ऊसी रस्ते पे तेरा इंतज़ार करता हूं।
तुझे क्या पता , हाल-ए-दिल मेरा , मै आज कल सुबह को शाम कहता हूं।
जहां ने मुझे हर पल प्यार ही प्यार दिया है।
बस इसी लिए , तुम से दूर जाने के बाद, मैंने अपना सबकुछ जहां के नाम किया है।
- रवि वर्मा
No comments:
Post a Comment