जीवन की कल्पना भी जिसके बीना अधूरी है।जिसके होने से, होती, ये सृष्टि पूरी है
जो त्याग का रूप है।
परमेश्वर का स्वरुप है।
मैं तो करता हूं, चाहत है, जहां करें उसकीं भक्ति,
नारी शक्ति।
जो जहां का उजाला है,
न टूटने ,न मुर्झाने वाली ,फूलों की माला है।
एक मिशाल है जहां के लिए,
जो बनी है परमेश्वर की जगह के लिए।
मां तेरे चरणों में है, मेरी सारी कि सारी भक्ति,
नारी शक्ति।
-रवि वर्मा
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