Friday, 15 December 2017

मेरे दिल के गूनाह।

वो हर सांस के साथ तूझे याद करना।
वो महफिलों मे भी तनहा रहना।
वो तेरे अलफाजों के सितम को भी हस के सहना।
वो तरी परछाईं की तरह तेरे पीछे पीछे चलना।
दुसमनों से ज्यादा सित्तम है, तुम्हारा,
छिन लिया मुझ से मेरा दिल, जो था कभी हमारा।
-रवि वर्मा

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