Monday, 21 January 2019

भविष्य परिवार।

दो कदम, एक सोच,
लछ्य एक,
पर सफलता एक सपना था।
क्योंकि परिवार अपना था।
सो चल पड़े हम साथ में।
दो कदम दो बात मे।।
फिर सोचा क्या होगा स्वीकार।
अपना भविष्य परिवार।
गली गली मोड़ मोड़।
सब बढ़े मंजिल मंजिल बोल बोल।
प्रारंभ हुआ वो सफर।
अब बताता हूं क्या हुआ असर,
लोगों ने पहले ठुकराया,
फिर हमें खुद ही बुलाया।
बदलाव है जिसका विचार,
अपना भविष्य परिवार।
अब सफर जो चल पड़ा था,
अब साथ में काफिला खड़ा था।
शिक्षा के मंच पर,
बिना कोई बाधा।
एक सोया जहां था जागा।
अब बांट रहा है ज्ञान का सार,
अपना भविष्य परिवार।
अब जो प्रारंभ हुआ है,
अब ना रूकेगा।
ये सफर चलता रहेगा।
बिना थके बिना रुके।

-रवि वर्मा(इश्क)

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