Saturday, 25 July 2020

खुशी हमारे घर भी हो, खुशी से वो भी रहें


लड़े जो हमारी खातिर,
उन्हें हम भुला नहीं सकते।
चलो याद करते हैं उन्हें, 
जिन्हें हम,वापस बुला नहीं सकते।
कर के माटी का फर्ज अदा,
वो जो जहां से चला गया।
जाते जाते भी यही कहा, देखो तुम खुश रहना,
मैं दुश्मनों को जला गया।
जो जिता गए करगिल युद्ध, चलो उनका गुनगान करें।
खुशी हमारे घर भी हो, खुशी से वो भी रहें।
नफ़रत की गोलियां अब ना बरसे।
बेटे से  मिलने को कोई ना तरसे।
हिन्दुस्तान ने हमेशा जोड़ना चाहा।
मिटा दिया उन्हें, जिन्होंने इसे तोड़ना चाहा।
भारत वो नहीं, जो कुछ भी चुपचाप सहे।
खुशी हमारे घर भी हो, खुशी से वो भी रहें।
इतिहास गवाह है, 
हमने पहले किसी पर, वार नहीं किया है।
देखना हो तो देख लो 65, 71, करगिल, 
हम ने कैसा जवाब दिया है।
पाकिस्तान जैसा देश, जो भीख का खाना,
और भीख की पानी पीता है।
अरे कभी तो अमन की बात करो,
क्यों नफ़रत की दुनिया में जीता है।
हम भी चाहते हैं, तुम प्यासे न मरो,
मोहब्बत की नदी तुम्हारे घर भी बहे।
खुशी हमारे घर भी हो, खुशी से वो भी रहें।
©रवि वर्मा

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