Friday, 17 July 2020

वतन देख लूं जरा सा, जलने से पहले।


Ravi Verma
बैठ मरूस्थल की सुखी रेत में,
समीर से बात कर रहा हूं।
वारि की तलाश में, मर ना जाऊं,
इस बात से डर रहा हूं।
थोड़ा समय दे, ऐ हवा,चलने से पहले।
वतन देख लूं जरा सा, जलने से पहले।
घर मेरा आज वीरान हो जाएगा।
अकेला लड़का हूं, जरा सोचो उनका क्या हाल हो जाएगा।
मां की उम्मीद, पिता का भरोसा,
मैं तोड़ कर जा रहा हूं।
जीत दिला कर जाना था, 
बहुत दुखी हू, उन्हें लड़ता छोड़ कर जा रहा हूं।
निभा दूंगा साथ फिर कभी, 
इस जन्म मेरे बगैर रहले।
वतन देख लूं जरा सा, जलने से पहले।
कम ना हो कभी आशियाना हमारा।
कसम है, अंतिम सांस तक बनूंगा सहारा।
मारते मारते दुशमनों को मरा हूं।
देखो अभी भी हथियार के साथ ही अड़ा हूं।
सालों ने छुप कर मारा, न आए सामने से लड़ने।
वतन देख लूं जरा सा, जलने से पहले।
चलो अलविदा स्वीकार करो।
जीत करीब है, भारत मां की जयकार भरो।
ऐ अनिल, चला अब श्री कृष्ण के पास, 
जिन्होंने मुझे, सिखाया था चलने।
वतन देख लूं जरा सा, जलने से पहले।
©रवि वर्मा
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यहां इस्तेमाल शब्दों के अर्थ:
हवा - समीर, अनिल।
घर - निलय।

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