Tuesday, 11 August 2020

श्री कृष्ण मिलन की आस है

Ravi Verma
विनती मेरी स्वीकार करो।

भव से जीवन पार करो।

असत्य मुख से कभी न कहूं।

भले दुख में कितना भी रहूं।

कृष्ण नाम ही, बस खास है।

श्री कृष्ण मिलन की आस है।।

मोह माया के परे जाना है।

अब तो बस, आपही को पाना है।

दान, धर्म, त्याग, और सत्य से जुड़ा रहूं।

जो मार्ग आप दिखाएं, उसी मार्ग पर सदा चलूं।

नहीं भाता कोई मुझे, 

मतलब की दुनिया पास है।

श्री कृष्ण मिलन की आस है।।

बाधाओं से, भरा है जगत ।

क्या करुंगा, पा के फलक।

धन लोभ ना मुझको ज्यादा हो।

सफल मेरा हर वादा हो।

इस प्यारी वसुंधरा पर, खुश वही है,

जो आपका दास है।

श्री कृष्ण मिलन की आस है।।

गीता ज्ञान कभी न भूलूं।

कर्म ऐसा करुं कि, गगन छू लूं।

कीर्तन का हरदम साथ हो।

सिर पर आपका हाथ हो।

आप ही जीवन, आप ही विनाश हैं।

श्री कृष्ण मिलन की आस है।।

- रवि वर्मा



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