सब नज़र और नजरिये की बात है।
तभी, कभी किसी के लिए सुबह,
तो कभी किसी के लिए रात है।
मत सोचो कौन किस धर्म से है।
महान वही है, जिसका रिश्ता कर्म से है।
दुनिया बहुत समझदार है,
उन्हें समझदार रहने दो।
अरे, जिनकी जितनी सोच है,
उन्हें उतना तो कहने दो।
सारे के सारे लोग शूद्र, जन्म से हैं।
महान वही है, जिसका रिश्ता कर्म से है।
शायद अब समझ आ गया होगा,
जो मैं समझाना चाहता हूं।
इंसान और इंसानियत सर्वोपरि हैं,
मैं तो बस यही मानता हूं।
वरना करो गलत, अगर मरना शर्म से है।
महान वही है, जिसका रिश्ता कर्म से है।
-रवि वर्मा

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