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ईमान- जिससे बनती है एक इंशान की पहचान

पहले इंसानो को अपने ईमान से बढ़ा प्यार होता था।
इसलिए अगर किसी कारण वश , किसी का ईमान मर जाता था तो,
वो उस रब के सामने जा के रोता था।
पर आज कल कुछ इंसानों को अपने ईमान से प्यार नहीं हैं।
इसलिए, उनकी नज़र में हर बुरा काम सही है।
जिस देश में रहते है, उसी देश के बारे में बुरा सोचते हैं।
मानों देश हो मांस , और वे उसे गीदड़ की तरह नोचते हैं।
क्यों न करें वे काम ऐसा , आज का हर नेता जो भ्रष्ट हो गया।
मिलते ही कुर्सी देश की,वो उस पर मख़मली चादर बिछा के सो गया।
अरे नेता, अपने ईमान को जगाओ ।
मेरी बात मानों तो अपने अंदर के शैतान को मिटाओ।
कुछ सिख उन फौजियों से ,जो मरते दम तक देश को समर्पित होता हैं।
नहीं करता फिक्र अपने परिवार की, न मां की ,
और न उस बूढ़े बाप की, जो उसकी याद में छुपकर रोता हैं।
कुछ सीख,कुछ सीख, कुछ सीख, ऐ नेता कुछ सीख।
नहीं चलता अगर देश तुझसे, तो तू बोले दे।
अपने मुंह से अपनी पोल खोल दे।
तब शायद उस रब के सामने, तू अपना मुंह दिखा पाएगा।
नहीं तो शर्म सार हो कफन ओढ़, उस रब के सामने जाएगा।
तब पछताने के सिवा ,कुछ न हासिल होगा।
दुनिया के सामने न सही,
उस रब के सामने तेरा नाम, जरूर काफिर होगा।
इसलिए दोस्तों मिटाने न दो, अपने ईमान।
बचा के रखो अपनी पहचान।
क्योंकि तुम से जुड़ी हैं, इस भारत की आन वान और शान।
और तुम ही हो इस भारत की जान।
जय हिंद, जय भारत।
-रवि वर्मा
#Ravi_Verma(इश्क)
#@Ravi_rvverma79
#@poetictwi
nice
ReplyDeleteThank you..☺️
DeleteThank you
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