मै दुबारा बुला नहीं सकता।
उस शहर ने जो दिया,
उसे भुला नहीं सकता।
वो प्यार की दास्तान मेरी।
वो बदनामी हर घड़ी तेरी।
वो हर बार तुम से बेवजह मिलना।
वो गुलों का दोनों के दिल में खिलना।
चाहता हूं,
पर सुला नहीं सकता।
उस शहर ने जो दिया,
उसे भुला नहीं सकता।
वो पढ़ने का बहाना।
वो रोज library जाना।
वो तुम्हारी याद में शामें गुजारना।
वो तेरी खातिर खुद को सुधारना।
आंसुओं से धो रहा हूं, यादों के कपड़ें,
जो किसी और से धूला नहीं सकता।
उस शहर ने जो दिया,
उसे भुला नहीं सकता।
वो जिंदगी नहीं मिलेगी दुबारा मुझे।
ना मैं ही अब मिलूंगा तुझे।
खुश रहना हमेशा तुम उसके साथ।
कभी मत बताना उसे वो रात।
मैं चाह कर भी,
तुम्हें रूला नहीं सकता।
उस शहर ने जो दिया,
उसे भुला नहीं सकता।
~ रवि वर्मा।

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