Wednesday, 15 July 2020

हवा का कोई झोंका जब जब मुझसे टकराता है,तब तब इस दिल को तेरा ख्याल आता है

A poem dedicated to true love.

Ravi Verma
चार पल साथ क्या रहे,
जमाने की नज़रों के शिकार हो गए।
उतना गैर ना हुए थे कभी,
जितना इस साल हो गए।
क्यों रूलाता है वो,
जो दूर चला जाता है।
हवा का कोई झोंका जब जब मुझसे टकराता है,
तब तब इस दिल को, तेरा ख्याल आता है।
अपनो को कैसे समझाऊं,
क्यों उदास हूं।
मौत को कभी भी गले लगा लूं,
उसके मैं इतना पास हूं।
पर कैसे छोड़ कर चला जाऊं उन्हें,
जिनसे बचपन का नाता है।
हवा का कोई झोंका जब जब मुझसे टकराता है,
तब तब इस दिल को, तेरा ख्याल आता है।
ना कोई रिश्ता है हमारा,
ना होगा कभी, इस बात की भी खबर है।
पर कभी पूछा नहीं, आज पूछता हूं,
तुम आज भी अकेली हो, या कोई हमसफ़र है?
इस तरह शब्दों से खेल तो,
बस आशिक ही खेल पाता है!
हवा का कोई झोंका जब जब मुझसे टकराता है,
तब तब इस दिल को, तेरा ख्याल आता है।

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पंख लगाकर चाहतो का, उड़ान हमें सिखाते हैं। राह-ए-मंजिल, हर सफ़र में, हमको वही दिखाते हैं। बचपन से वो साथ हमारे लिखते हैं मिटाते है...