जमाने की नज़रों के शिकार हो गए।
उतना गैर ना हुए थे कभी,
जितना इस साल हो गए।
क्यों रूलाता है वो,
जो दूर चला जाता है।
हवा का कोई झोंका जब जब मुझसे टकराता है,
तब तब इस दिल को, तेरा ख्याल आता है।
अपनो को कैसे समझाऊं,
क्यों उदास हूं।
मौत को कभी भी गले लगा लूं,
उसके मैं इतना पास हूं।
पर कैसे छोड़ कर चला जाऊं उन्हें,
जिनसे बचपन का नाता है।
हवा का कोई झोंका जब जब मुझसे टकराता है,
तब तब इस दिल को, तेरा ख्याल आता है।
ना कोई रिश्ता है हमारा,
ना होगा कभी, इस बात की भी खबर है।
पर कभी पूछा नहीं, आज पूछता हूं,
तुम आज भी अकेली हो, या कोई हमसफ़र है?
इस तरह शब्दों से खेल तो,
बस आशिक ही खेल पाता है!
हवा का कोई झोंका जब जब मुझसे टकराता है,
तब तब इस दिल को, तेरा ख्याल आता है।


Very nice poem
ReplyDeleteBeautiful you are amazing
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