Thursday, 2 July 2020

थोड़ी देर पास बैठ जाऊं,तो लाज़िमी है, धड़कने बेकाबू होती हैं

थोड़ी देर पास बैठ जाऊं,
तो लाज़िमी है, धड़कने बेकाबू होती हैं।

Ravi Verma
प्यार के किस्से
बड़े लाजवाब होते हैं।
सवाल कई सारे,
अक्सर बेजवाब होते हैं।
कुदरत के किए कर्म हैं,
जो दुनिया मोहब्बत में खोती है
थोड़ी देर पास बैठ जाऊं,
तो लाज़िमी है, धड़कने बेकाबू होती हैं।
दाग से परिपूर्ण चांद को,
लोग प्रेम की निशानी कहते हैं।
पर दाग अगर इंसान में हो,
तो कुछ एक ही, उसे प्यार करते हैं।
हर किसी की जिंदगी,
कहाँ चैन से सोती है।
थोड़ी देर पास बैठ जाऊं,
तो लाज़िमी है, धड़कने बेकाबू होती हैं।
इश्क़ से दुश्मनी करने की कोशिश,
न जाने कब मेरी, कामयाब होगी।
सुबह भी देख ली, दोपहर भी देख चुका,
उम्मीद है, अब शाम होगी।
आंखें गम के नहीं,
अब खुशियों के साथ रोती हैं।
थोड़ी देर पास बैठ जाऊं,
तो लाज़िमी है, धड़कने बेकाबू होती हैं।
©रवि वर्मा

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