मै चुप तो नहीं रहूंगा।
अब चाटनेवाले को तो,
चाटनेवाला ही कहूंगा।
जो कुर्बान हुआ देश की खातिर,
उसने उसे आतंकवादी नाम दिया।
वो बुजदिल बचपन का था,
तो बुजदिल जैसा काम किया।
इंसान उसे कह नहीं सकता,
जो जन्म से चांडाल था।
भगत सिंह का हत्यारा,
सबसे बड़ा गद्दार था।
बेवकूफ को कुर्सी दे कर,
खुद वो देश से चला गया।
जाते जाते भी नफ़रत का,
दिया देश में जला गया।
नेताओं की मेहरबानी से, अब भी वो जल रही है।
आए दिन नफ़रत की, एक नई कहानी चल रही है।
आए दिन नफ़रत की, एक नई कहानी चल रही है।
सबको खबर तो है ही,
कौन कितना बड़ा काल था।
भगत सिंह का हत्यारा,
सबसे बड़ा गद्दार था।
©रवि वर्मा


No comments:
Post a Comment