हर बेरंग जिन्दगी को रंग देना चाहता हूं
चार दिन किसी को अपना कहने से, कोई अपना नहीं होता।
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| Ravi Verma |
इस जहां मे हर तस्वीर तुम्हारी हो , ये मुमकिन नहीं हैं।
क्योंकि हर किसी की जिंदगी , कभी कहीं, तो कभी कहीं रही हैं।
बताओं , दुनिया वालों क्या हैं, तूझ मे बेरंग,
मैं लेना चाहता हूं।
हर बेरंग जिंदगी को रंग देना चाहता हूं।
हम वो नहीं, जो ख्वाबों मे मंजिल तलाशा करते हैं।
हम वो नहीं , जो बिना कर्म ही आशा करते हैं।
हम वो है, जो हर मुश्किल से टकराते हैं।
हम वो है ,जो हर नजर से नजर मिलाते।
तभी, मैं अपनी जिंदगी को कभी न ख्त्म होने वाला जंग देना चाहता हूं।
हर बेरंग जिंदगी को रंग देना चाहता हूं।
- रवि वर्मा
#Ravi_Verma(इश्क)
#@Ravi_rvverma79
#Ravi_Verma(इश्क)
#@Ravi_rvverma79

बहुत खूब रवि, बेरंग जिंदगी को रंग देना चाहता हूँ ।अच्छा प्रयास है
ReplyDeleteRavi it's me nirmal rai singh
ReplyDeletethank you mam ,
DeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteNice poem
ReplyDeletethank you brother
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