Monday, 13 November 2017

हर बेरंग जिन्दगी को रंग देना चाहता हूं।











हर बेरंग जिन्दगी को रंग देना चाहता हूं

                                         चार दिन किसी को अपना कहने से, कोई अपना नहीं होता।
Ravi Verma
हर ख्वाब अगर पूरे हो जाते तो, कुछ सपना नहीं होता।
इस जहां मे हर तस्वीर तुम्हारी हो , ये मुमकिन नहीं हैं।
क्योंकि हर किसी की जिंदगी , कभी कहीं,  तो कभी कहीं रही हैं।
बताओं , दुनिया वालों क्या हैं, तूझ मे बेरंग,
मैं लेना चाहता हूं।
हर बेरंग जिंदगी को रंग देना चाहता हूं।
हम वो नहीं, जो ख्वाबों मे मंजिल तलाशा करते हैं।
हम वो नहीं , जो बिना कर्म ही आशा करते हैं।
हम वो है, जो हर मुश्किल से टकराते हैं।
हम वो है ,जो हर नजर से नजर मिलाते।
तभी, मैं अपनी जिंदगी को कभी न ख्त्म होने वाला  जंग देना चाहता हूं।
हर बेरंग जिंदगी को रंग देना चाहता हूं।
- रवि वर्मा
#Ravi_Verma(इश्क)
#@Ravi_rvverma79

6 comments:

  1. बहुत खूब रवि, बेरंग जिंदगी को रंग देना चाहता हूँ ।अच्छा प्रयास है

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  2. Ravi it's me nirmal rai singh

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पंख लगाकर चाहतो का, उड़ान हमें सिखाते हैं। राह-ए-मंजिल, हर सफ़र में, हमको वही दिखाते हैं। बचपन से वो साथ हमारे लिखते हैं मिटाते है...