किसी पर करता हूं,
पर कुछ बात थी उसमे,
तभी तो उस पर मरता हूं।
ये मेरा ख्याल, तब बहुत भारी पड़ा।
जब देखा किसी और के, साथ उसको खड़ा।
मत पूछो खफा है उससे, जिंदगी कितनी।
बड़े दावे किए उसने मोहब्बत के,
गले लगाया तो, धड़कने बेवफा निकलीं।
दर्द के आशियाने में,
घर बना कर रहने लगे हैं।
उसके एक धोखे के कारण,
मोहब्बत को नफरत कहने लगे हैं।
फिर भी जिंदगी,
मुस्कुरा कर ही बिताते हैं।
अब तन्हा भले हैं पर,
गमों को नहीं खुशियों को ही जिताते हैं।
न सीख पाता कभी,
जितना उसके एक धोखे ने सीख दीं
बड़े दावे किए उसने मोहब्बत के,
गले लगाया तो, धड़कने बेवफा निकलीं।
©रवि वर्मा

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