Saturday, 20 June 2020

जबसे तुम्हारे नाम की मिश्री होठों पर लगाई है,मीठा सा गम है, मीठी सी तन्हाई



Ravi Verma
कभी कहा था तुम से, मैं बहुत हो सकता हूं,
अगर तुम जरा सा मिल जाओ।
चलों कोई बात नहीं,
तुम आओ न आओ।
सफर कल भी हसीन था, आज भी हसीन है,
पर बस, साथ एक तुम्हारा नहीं है।
तुम्हारे पास तो है,
पर मेरे पास, सहारा नहीं है।
न जाने क्यों बेवजह का गम है, 
बेवजह की रुसवाई।
जबसे तुम्हारे नाम की मिश्री होठों पर लगाई है,
मीठा सा गम है, मीठी सी तन्हाई।
हर दिन एक नई शुरूआत तो करता हूं,
पर हर शाम, कुछ काम छूट जाता है।
न जाने क्यों दिल अपने आप से भी,
कभी कभी रूठ जाता है।
तुम नहीं जानती पर,
तुम्हें मानता हूं, अपनी परछाई।
जबसे तुम्हारे नाम की मिश्री होठों पर लगाई है,
मीठा सा गम है, मीठी सी तन्हाई।
दुआ है तू हरदम खुश रहे।
गम तुम्हें अपना, कभी न कहे।
मुश्किल राह कितनी भी हो,
तुम हर जगह सफलता पाओ।
हर मंजिल तुम्हारे कदम चूमे,
तुम जहां भी जाओ।
किसी ने नहीं कहा था उतना, तुम जितना कह पाई।
जबसे तुम्हारे नाम की मिश्री होठों पर लगाई है,
मीठा सा गम है, मीठी सी तन्हाई।
©रवि वर्मा

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