Wednesday, 1 July 2020

गलत था मैं कि, तू बहुत अच्छी है

गलत था मैं कि, तू बहुत अच्छी है
Ravi Verma
कौन कहता कि,
हर सज़ा के लिए, गुनाह जरूरी हैं।
क्या हाथों में आज भी, 
मेरे ही नाम की चूड़ी हैं।
क्योंकि इश्क़ हम से बेहतर, 
कोई कर नहीं सकता।
और जितना हम मरे हैं,
उतना तो कोई, मर नहीं सकता।
मोहब्बत मेरी आज भी सच्ची है।
गलत था मैं कि, तू बहुत अच्छी है।
तेरी मोहब्बत में, वो सौदागर वाली नज़र,
मैं पढ़ नहीं पाया।
तभी मैं वहीं रह गया,
तेरे जितना, बढ़ नहीं पाया।
आते जाते सभी को, 
गले लगा लेता हूं।
प्यार जहाँ भी ज्यादा मिलता है,
वहां से, खुद को भगा लेता हूं।
मुझे समझने के लिए,
ये दुनिया अभी बच्ची है।
गलत था मैं कि, तू बहुत अच्छी है।

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